Chirayata Ki Kheti - 1 बीघा में ₹80,000 तक कमाई | Medicinal Plant Farming Guide

 

Chirayata Ki Kheti - 1 बीघा में ₹80,000 तक कमाई | Medicinal Plant Farming Guide

Chirayata Ki Kheti - 1 बीघा में ₹80,000 तक कमाई


नमस्कार दोस्तों!

आज हम एक ऐसी medicinal crop के बारे में बात करने जा रहे हैं जो किसानों के लिए कम लागत में ज्यादा मुनाफा दे सकती है। इस फसल का नाम है चिरायता।

चिरायता एक औषधीय पौधा है जिसकी जड़, तना और पत्तियां सभी दवाइयों में उपयोग होती हैं, इसलिए इसका बाजार हमेशा बना रहता है। भारत में आयुर्वेदिक दवाइयों और हर्बल प्रोडक्ट्स की बढ़ती मांग के कारण इसकी खेती किसानों के लिए एक अच्छा बिजनेस बनती जा रही है।

 

चिरायता की खासियत और उपयोग
 

चिरायता एक प्राचीन औषधीय पौधा है जिसका उपयोग आयुर्वेद में सदियों से किया जा रहा है।  Ministry of Ayush  के अनुसार भी चिरायता एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा है।

 

Chirayata Ki Kheti - 1 बीघा में ₹80,000 तक कमाई

इसके मुख्य उपयोग इस प्रकार हैं |

बुखार की दवा बनाने में

पेट से जुड़ी बीमारियों में

लीवर की समस्या में

डायबिटीज कंट्रोल करने में

इम्युनिटी बढ़ाने में

इस पौधे का पूरा हिस्सा दवा बनाने में काम आता है, इसलिए इसमें कोई भी हिस्सा बेकार नहीं जाता।

भारत में यह पहले पहाड़ी इलाकों में उगाया जाता था, लेकिन अब मैदानी क्षेत्रों में भी इसकी सफल खेती होने लगी है।

 

चिरायता की बुवाई का सही समय

चिरायता की खेती के लिए सबसे अच्छा समय जून से जुलाई (मानसून सीजन) माना जाता है।

जानकारी

 

बुवाई का समय  जून जुलाई

कटाई का समय दिसंबर जनवरी

फसल अवधि    लगभग 5–6 महीने

यह एक short duration crop है इसलिए किसान जल्दी मुनाफा कमा सकते हैं।

 

बीज की मात्रा और बुवाई का तरीका

एक बीघा खेत के लिए लगभग 5 किलो बीज की आवश्यकता होती है।

बुवाई की विधि

1. खेत को अच्छी तरह जोतकर समतल करें।

2. अच्छी गुणवत्ता वाले बीज का चयन करें।

3. कतार विधि (Row Method) से बुवाई करें।

4. पौधों के बीच 20 से 30 सेंटीमीटर दूरी रखें।

खराब बीज से अमरबेल (Amarbel) नाम की परजीवी घास लग सकती है जो पूरी फसल को नुकसान पहुंचा सकती है।

 

चिरायता की खेती में देखभाल

चिरायता की खेती में ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती, लेकिन कुछ जरूरी काम करने चाहिए।

मुख्य देखभाल

समय-समय पर निराई-गुड़ाई

जरूरत पड़ने पर सिंचाई

Chirayata Ki Kheti - 1 बीघा में ₹80,000 तक कमाई


 

कीट नियंत्रण

जैविक कीटनाशक

नीम का तेल

गोमूत्र आधारित स्प्रे

जैविक कीटनाशक मे “किसान जीवामृत का उपयोग भी कर सकते हैं।” इसके साथ ही यदि किसान चाहे तो मिट्टी का pH मान  का आकलन भी खुद लगा सकते है इसके लिए बस Digital Soil Tester with Moisture Sensor and Light Meter  की जरूरत है जिसे आप amazon एक क्लिक पर खरीद सकते है 

 

 

चिरायता की खेती में खर्च

एक बीघा में चिरायता की खेती का कुल खर्च लगभग:

₹1500 से ₹2000 तक

 

इसमें शामिल हैं|

बीज

मजदूरी

हल्की खाद

खेत की तैयारी

 

यह अन्य नकदी फसलों की तुलना में कम लागत वाली खेती है। “यदि किसान चाहे तो गर्मी में किसान मूंग की वैज्ञानिक खेती से भी अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।

 

चिरायता का उत्पादन

एक बीघा खेत से लगभग -

15 से 20 क्विंटल सूखा भूसा प्राप्त हो सकता है। इसके अलावा 25 से 50 किलो बीज भी निकलते हैं।

 

चिरायता की खेती से कमाई

अगर बाजार में औसत भाव ₹7000 से ₹8000 प्रति क्विंटल है तो -

संभावित कमाई

 

 उत्पादन        कीमत   कुल कमाई

15 क्विंटल     ₹7000        ₹1,05,000

 

बीज की बिक्री से अतिरिक्त -

₹37,500 से ₹1,00,000 तक

कुल संभावित मुनाफा

लगभग ₹80,000 प्रति बीघा तक।

 

चिरायता की बिक्री कहाँ करें

मध्य प्रदेश में चिरायता की सबसे बड़ी मंडियों में से एक है:

नीमच मंडी

कई व्यापारी सीधे खेत से भी माल खरीद लेते हैं। इसके अलावा आप इसे बेच सकते हैं

 

आयुर्वेदिक दवा कंपनियों को

हर्बल दुकानों में

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर

चिरायता की खेती के फायदे

कम लागत में ज्यादा मुनाफा

औषधीय पौधा होने से हमेशा मांग

 

5–6 महीने में तैयार

कम कीटनाशक की जरूरत

पर्यावरण के लिए सुरक्षित

 

चिरायता की खेती में सावधानियां

हमेशा Certified seeds खरीदें

अमरबेल से बचाव करें

कटाई सही समय पर करें

सूखे स्थान पर स्टोरेज करें

 

चिरायता की खेती किसानों के लिए एक बेहतरीन medicinal farming option है।. ICAR (Indian Council of Agricultural Research) के अनुसार कम लागत, कम जोखिम और अच्छा मुनाफा इसे एक स्मार्ट खेती का विकल्प बनाते हैं। अगर किसान सही तकनीक और सही समय पर इसकी खेती करें तो यह फसल उनकी आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

 

 

 

Q1. चिरायता की खेती का सही समय क्या है?

चिरायता की बुवाई का सही समय जून से जुलाई के बीच होता है।

 

Q2. एक बीघा में चिरायता का कितना बीज लगता है?

लगभग 5 किलो बीज एक बीघा खेत के लिए पर्याप्त होता है।

 

Q3. चिरायता की फसल कितने दिन में तैयार होती है?

यह फसल लगभग 5 से 6 महीने में तैयार हो जाती है।

 

Q4. चिरायता की खेती से कितना मुनाफा हो सकता है?

एक बीघा से लगभग ₹80,000 तक का मुनाफा हो सकता है।

 

Q5. चिरायता कहाँ बेचा जाता है?

मध्य प्रदेश की नीमच मंडी में इसकी सबसे ज्यादा खरीद-फरोख्त होती है।


Q6. चिरायता की फसल में सिंचाई कितनी बार करनी चाहिए?

मानसून में बारिश पर्याप्त होने पर ज्यादा सिंचाई की जरूरत नहीं होती। अगर बारिश कम हो तो 15–20 दिन के अंतराल पर हल्की सिंचाई करना फायदेमंद रहता है।

 

Q7. चिरायता की खेती में सबसे बड़ी समस्या क्या होती है?

इस फसल में सबसे बड़ी समस्या अमरबेल (Amarbel) नाम की परजीवी घास होती है, जो पौधे का रस चूसकर फसल को नुकसान पहुंचाती है।

 

Q8. चिरायता की खेती पहाड़ी इलाकों के अलावा कहाँ की जा सकती है?

अब चिरायता की खेती मैदानी क्षेत्रों जैसे मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और बिहार में भी सफलतापूर्वक की जा रही है।

 

Q9. चिरायता की मांग किन उद्योगों में ज्यादा होती है?

चिरायता की मांग मुख्य रूप से इन क्षेत्रों में होती है:

आयुर्वेदिक दवा कंपनियां

हर्बल प्रोडक्ट कंपनियां

फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री

 

 Q10. क्या चिरायता की खेती में सरकारी सहायता मिलती है?

कई राज्यों में medicinal plant cultivation के लिए सरकार द्वारा सब्सिडी और ट्रेनिंग दी जाती है। इसके लिए किसान कृषि विभाग से जानकारी ले सकते हैं।

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