क्या आप गर्मी के मौसम में कम समय और कम पानी में अच्छा मुनाफा कमाना चाहते हैं? मूंग (ग्रीन ग्राम) की खेती आपके लिए सबसे अच्छा विकल्प है। यह फसल सिर्फ 60-70 दिनों में तैयार हो जाती है, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है और बाजार में अच्छा दाम मिलता है। इस लेख में हम बुवाई का सही समय, उन्नत किस्में, खाद प्रबंधन, सिंचाई, कीट-रोग नियंत्रण और कटाई तक की पूरी वैज्ञानिक जानकारी दे रहे हैं। मध्य प्रदेश जैसे क्षेत्रों में तलवार मूंग, PDM 139 (सम्राट) जैसी किस्मों से 8-12 क्विंटल प्रति एकड़ पैदावार आसानी से पाई जा सकती है। पढ़ें और इस साल मूंग से बंपर कमाई करें!
मूंग की खेती आजकल किसानों के बीच बहुत
लोकप्रिय हो रही है, खासकर गर्मी (जायद) सीजन में। यह न सिर्फ कम
समय में तैयार होती है, बल्कि कम पानी और कम मेहनत में भी अच्छा रिटर्न
देती है। साथ ही, इसकी जड़ों में मौजूद राइजोबियम बैक्टीरिया
मिट्टी में नाइट्रोजन फिक्स करते हैं, जिससे अगली फसल के लिए मिट्टी स्वस्थ
रहती है। मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश
जैसे राज्यों में यह फसल किसानों की आय बढ़ाने का बड़ा साधन बन चुकी है।
1. बुवाई का सबसे सही समय और इसके फायदे
गर्मी में मूंग की बुवाई का आदर्श समय फरवरी के अंत से मार्च के मध्य तक होता है, यानी 25 फरवरी से 15-20 मार्च के बीच। कुछ विशेषज्ञ 15 मार्च से 10 अप्रैल तक भी सलाह देते हैं, लेकिन ज्यादा देर करने पर फूल आने के समय गर्मी बढ़ने से फूल झड़ने का खतरा रहता है।
इस समय बुवाई करने के मुख्य फायदे
- फूल आने पर मौसम हल्का ठंडा रहता है, जिससे फूल और फलियां अच्छी बनती हैं।
- फसल 60-70 दिनों में पककर तैयार हो जाती है, यानी मई-जून तक कटाई हो सकती है।
- पिछले रबी फसल (गेहूं, सरसों, चना) के बाद खेत खाली रहता है, तो बिना ज्यादा तैयारी के बुवाई हो जाती है।
- कम पानी की जरूरत पड़ती है और बाजार में मूंग का भाव अच्छा मिलता है।
ध्यान दें - अगर आपका क्षेत्र मध्य प्रदेश या इंदौर के आसपास है, तो स्थानीय कृषि केंद्र से मौसम के हिसाब से सलाह जरूर लें, क्योंकि 2026 में कुछ जगहों पर बारिश का पैटर्न बदल सकता है।
2. खेत की तैयारी और खाद का सही प्रबंधन
खेत तैयार करना सबसे पहला और महत्वपूर्ण कदम है। अगर पिछली फसल के अवशेष (पराली) पड़े हैं, तो उन्हें रोटावेटर या कल्टीवेटर से मिट्टी में मिला दें। इससे वे सड़कर प्राकृतिक खाद बन जाते हैं और मिट्टी की सेहत सुधरती है।
खाद प्रबंधन (प्रति एकड़)
- बेसल डोज (बुवाई के समय) - 1 बोरी DAP (या TSP) + 10-15 किलो यूरिया + 5 किलो सल्फर।
- अगर सड़ी हुई गोबर की खाद (4-5 टन प्रति एकड़) उपलब्ध है, तो जरूर डालें। इससे पैदावार में 1-1.5 क्विंटल की बढ़ोतरी हो सकती है।
- बीज उपचार में राइजोबियम कल्चर जरूर लगाएं। यह नाइट्रोजन फिक्सेशन बढ़ाता है और रासायनिक यूरिया की बचत करता है।
- फसल 10-15 दिन की होने पर NPK 19:19:19 का फोलियर स्प्रे करें।
- फूल आने के समय (40-45 दिन) NPK 13:0:45 या पोटाश युक्त स्प्रे से फलियां अच्छी भरती हैं।
जैविक खेती करने वाले किसान गोबर खाद के साथ वर्मीकम्पोस्ट भी मिला सकते हैं, जिससे मिट्टी लंबे समय तक उपजाऊ बनी रहती है।
3. उन्नत और विश्वसनीय किस्में चुनें
सही किस्म चुनना पैदावार का 50% राज है। 2025-2026 में ये किस्में सबसे ज्यादा चर्चित और सफल साबित हो रही हैं
- PDM 139 (सम्राट) - पीले मोज़ेक वायरस (YMV) के खिलाफ बहुत मजबूत। चमकदार बड़े दाने, 55-65 दिन में तैयार। 8-12 क्विंटल प्रति एकड़ तक पैदावार।
- तलवार मूंग - मध्य प्रदेश में बहुत पॉपुलर। मजबूत पौधा, अच्छी फलियां।
- IPM 4103 (शिखा) - रोग प्रतिरोधी, अच्छी उपज।
- IFS बंसी गोल्ड - जल्दी पकने वाली, बाजार में अच्छा भाव।
- अन्य - SML 668, ML 818, Virat आदि भी अच्छी हैं।
ये किस्में सही देखभाल से 6-10 क्विंटल प्रति एकड़ आसानी से दे सकती हैं। हमेशा प्रमाणित बीज ही खरीदें।
4. बीज की मात्रा, बुवाई का तरीका और उपचार
- बीज मात्रा - एक एकड़ के लिए 10-12 किलो (गर्मी में ज्यादा घनत्व के लिए)।
- बुवाई विधि - लाइन से लाइन 1 फीट (30 सेमी) और पौधे से पौधे 10 सेमी दूरी रखें। इससे पौधों को हवा-रोशनी मिलती है और फलियां ज्यादा बनती हैं।
- बीज उपचार - बुवाई से पहले थायरम या कैप्टान (3 ग्राम/किलो बीज) से फफूंद रोग से बचाव। साथ में राइजोबियम + PSB कल्चर लगाएं।
5. देखभाल, सिंचाई और कीट-रोग प्रबंधन
- सिंचाई - पूरी फसल में 3-4 बार पानी काफी। पहली सिंचाई बुवाई के 20-25 दिन बाद, फिर फूल आने पर (40-45 दिन) जरूर नमी बनाए रखें। फूल झड़ने से बचाने के लिए पानी की कमी न होने दें। पकने से 15 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें।
- खरपतवार नियंत्रण - बुवाई के 20-25 दिन बाद निराई-गुड़ाई या पेंडीमेथालिन जैसे हर्बिसाइड का इस्तेमाल।
- कीट-रोग
- पीला मोज़ेक वायरस - प्रतिरोधी किस्म चुनें।
- इल्ली/फली छेदक - नीम आधारित कीटनाशक या उचित दवा (इमिडाक्लोप्रिड/डाइमेथोएट) का छिड़काव।
- थ्रिप्स/माहू -समय पर स्प्रे और पीले चिपचिपे ट्रैप लगाएं।
अंत में - मुनाफा कैसे बढ़ाएं?
अगर आप सही समय पर बुवाई करें, उन्नत किस्म चुनें, संतुलित खाद और समय पर देखभाल करें, तो मूंग की खेती से कम समय में 50-80 हजार रुपये प्रति एकड़ तक मुनाफा आसानी से कमा सकते हैं। लागत कम है, रिस्क भी कम, और मिट्टी भी फायदे में रहती है।
किसान भाइयों, इस साल मूंग की खेती जरूर ट्राई करें और अपने अनुभव कमेंट में शेयर करें। अगर कोई सवाल हो तो पूछें, हम साथ हैं!
जय जवान, जय किसान!



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