Lucknow Bana Mango Innovation Ka Global Center
Lucknow अब सिर्फ अपनी तहजीब और नवाबी अंदाज के लिए ही नहीं, बल्कि आम की अनोखी खेती और वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए भी दुनिया भर में चर्चा में है। केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान यानी Central Institute for Subtropical Horticulture (CISH) के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा प्रयोग किया है जिसने किसानों और कृषि विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है।
वैज्ञानिकों ने ग्राफ्टिंग तकनीक यानी कलम विधि की मदद से एक ही आम के पेड़ पर 234 अलग-अलग किस्मों के आम उगाने में सफलता हासिल की है। यह उपलब्धि भारतीय बागवानी और कृषि विज्ञान के लिए एक बड़ी कामयाबी मानी जा रही है।
एक ही पेड़ पर 234 Mango Varieties Ka Amazing Experiment
इस खास पेड़ पर दशहरी, लंगड़ा, चौसा, आम्रपाली समेत कई दुर्लभ और पारंपरिक किस्मों के आम लगाए गए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तकनीक से कम जगह में ज्यादा किस्मों की खेती संभव हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रयोग सिर्फ खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे देश की पारंपरिक आम किस्मों को सुरक्षित रखने में भी मदद मिलेगी। आने वाले समय में यह तकनीक छोटे किसानों के लिए भी काफी फायदेमंद साबित हो सकती है।
Mango Man Kalim Ullah Khan Ne Banaya Record
Kalim Ullah Khan, जिन्हें लोग “Mango Man” के नाम से जानते हैं, ने भी आम की खेती में नया इतिहास रचा है। मलिहाबाद के रहने वाले पद्मश्री सम्मानित किसान कलीम उल्लाह खान का दावा है कि उन्होंने अपने एक विशेष पेड़ पर 234 प्रकार के आम उगाए हैं।
उनका कहना है कि यह उपलब्धि कई वर्षों की मेहनत, अनुभव और आम के प्रति प्रेम का परिणाम है। देश-विदेश से लोग उनके बाग देखने पहुंचते हैं।
Lucknow Mango Festival Me Dikhti Hain 800 Se Zyada Varieties
अगर आप आम प्रेमी हैं तो Lucknow Mango Festival आपके लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। हर साल आयोजित होने वाले इस महाउत्सव में देशभर की लगभग 800 किस्मों के आम प्रदर्शित किए जाते हैं।
तीन दिन तक चलने वाले इस उत्सव में पर्यटक, किसान और कृषि विशेषज्ञ नई किस्मों और आधुनिक तकनीकों के बारे में जानकारी हासिल करते हैं। यह आयोजन भारत की समृद्ध आम विरासत को दुनिया के सामने पेश करने का एक बड़ा मंच बन चुका है।
Bharat Ki Mango Heritage को मिल रही नहीं पहचान
भारत में करीब 800 किस्मों के आम पाए जाते हैं और लखनऊ के वैज्ञानिकों व किसानों की यह पहल इस विरासत को नई पहचान दिला रही है। आधुनिक तकनीक और पारंपरिक अनुभव का यह संगम आने वाले समय में भारतीय बागवानी क्षेत्र के लिए एक नई दिशा तय कर सकता है।
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